गर्भवती महिला की कौन कौन सी जांच होती है?HealthPlanet

Posted on Thu 13th Oct 2022 : 12:44

प्रेग्नेंसी के दौरान कौन से टेस्ट होते हैं सबसे ज्यादा जरूरी?

प्रेग्नेंसी वो समय है जब खुशी और घबराहट दोनों ही होती है और ज्वार-भाटे की तरह भावनाएं आती हैं। एक तरफ तो आप इतनी एक्साइटेड होती हैं कि आपकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहता है अगले ही पल आप बहुत ही गहरी सोच में डूब जाती हैं कि आखिर आगे क्या होगा। आप डॉक्टर के पास जाती हैं और डॉक्टर आपको तरह-तरह के टेस्ट्स के बारे में बताता है और आप ये सोचती हैं कि आप हेल्दी हैं तो फिर इतने टेस्ट्स और स्क्रीनिंग की जरूरत क्या है।

पर मेडिकल रिसर्च और ट्रायल की खूबियों से अब हम बच्चों के डेवलपमेंट और उनकी सेहत को ट्रैक किया जा सकता है। ये मां और बच्चे दोनों की सेहत के लिए काफी जरूरी है। साथ ही साथ प्रेग्नेंसी अल्ट्रासाउंड चेक्स हमेशा बताते हैं कि बच्चे का विकास कैसे हो रहा है और उसकी स्थिति क्या है और ये प्रेग्नेंसी के हर ट्राइमेस्टर में होते हैं। आपको सारी जानकारी 'प्रेग्नेंसी के दौरान अल्ट्रासाउंड' नामक सेक्शन में नीचे मिलेगी।
पहले ट्राइमेस्टर के टेस्ट्स (पहले हफ्ते से 12वें हफ्ते तक)

प्रेग्नेंसी के पहले ट्राइमेस्टर में होने वाली मां का शरीर बहुत तेज़ी से बदलता है और आने वाले समय में एनर्जी की जरूरत को पूरा करने की तैयारी करता है। बहुत सारे शारीरिक और भावनात्मक बदलाव उसके शरीर में होते हैं। नीचे उन टेस्ट्स की लिस्ट दी गई है जो पहले ट्राइमेस्टर में जरूरी होते हैं।
नियमित ब्लड टेस्ट-

कैसे कलेक्ट किया जाता है सैंपल?

ये टेस्ट्स महिला की बाजू में मौजूद नस से खून के सैंपल इकट्ठा कर किए जाते हैं।

कौन से टेस्ट्स होते हैं?

1. सीबीसी काउंट (कम्प्लीट ब्लड काउंट)-

ये टेस्ट इस जानकारी के लिए किया जाता है कि आपके खून में मौजूद अलग-अलग सेल्स किन हालात में हैं। इसमें रेड ब्लड सेल काउंट (RBC काउट), व्हाइट ब्लड सेल काउंट (WBC काउंट) और प्लेटलेट काउंट मौजूद होते हैं।

क्यों जरूरी है ये टेस्ट- ये आपके शरीर की हेल्थ और किसी भी तरह के एक्टिव इन्फेक्शन की जानकारी लेने के लिए जरूरी होता है। हीमोग्लोबिन, आयरन लेवल आदि की जानकारी बहुत जरूरी है ये जानने के लिए कि कहीं मां को एनीमिया तो नहीं। अगर मां को एनीमिया होता है तो तुरंत ही सप्लीमेंट्स देने शुरू किए जाते हैं। WBC वैल्यू ये बताती है कि शरीर में कोई इन्फेक्शन तो नहीं। ये आमतौर पर अन्य लक्षणों से जुड़ा भी होता है। अगर ये बढ़ा हुआ पाया जाता है तो डॉक्टर बताते हैं कि किस तरह के ट्रीटमेंट की आगे जरूरत है।

2. ब्लड ग्रुप-

ये टेस्ट बताता है कि आपका ब्लड ग्रुप कौन सा है जैसे A, B, AB या O

ये क्यों जरूरी है- बच्चे के पैदा होने के दौरान किसी भी आपातकालीन स्थिति में आपको अगर खून की जरूरत हुई तो ब्लड ग्रुप की जानकारी पहले से तैयार रहने में मदद करेगी।

3. Rh फैक्टर टेस्ट-

ये टेस्ट खून में rhesus फैक्टर की मौजूदगी के बारे में बताता है। ये एक प्रोटीन है जो ब्लड सेल्स में मौजूद रहता है।

ये क्यों जरूरी है- अगर प्रोटीन मौजूद होता है तो ब्लड Rh-पॉजिटिव कहलाता है और अगर ये नहीं होता तो ब्लड Rh-नेगेटिव कहलाता है। अगर मां नेगेटिव है और बच्चा Rh-पॉजिटिव है तो शरीर में ऐसी एंटीबॉडी भी बन सकती हैं जो फीटस के लिए नुकसानदेह हो सकती है।
रूटीन यूरिन और यूरिन कल्चर टेस्ट्स -

कैसे कलेक्ट किया जाता है सैंपल?

यूरिन सैम्पल आपके हेल्थ स्टेटस के बारे में काफी कुछ बताता है और बहुत जरूरी होता है। जांच के लिए ताज़ा यूरिन सैम्पल लिया जाता है।

क्या चेक किया जाता है?

RBC की मौजूदगी- रेड ब्लड सेल्स और व्हाइट ब्लड सेल्स एक्टिव यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन की जानकारी देते हैं।
यूरिन में ग्लूकोज लेवल की स्क्रीनिंग होती है ताकि जेस्टेशनल डायबिटीज का स्टेटस पता चले।
ब्लड और यूरिन में हाई प्रोटीन लेवल बहुत खतरनाक प्रीक्लैम्पिया (preeclampsia) की जानकारी दे सकते हैं।
यूरिन कल्चर टेस्ट चेक करता है कि यूरिनरी ट्रैक्ट में किसी तरह का इन्फेक्शन या बैक्टीरिया तो मौजूद नहीं है।
रिसर्चर्स के अनुसार यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन फीटस के IQ लेवल को कम कर सकते हैं।

थायराइड टेस्ट-

हमारे गले में मौजूद वॉइस बॉक्स के नीचे एक छोटा सा ग्लैंड होता है जिसे थायराइड कहते हैं। ये छोटा सा ग्लैंड बहुत ही ताकतवर हार्मोन रिलीज करता है जिसे थायराइड हार्मोन कहते हैं जिसे TSH और फ्री T4 से नापा जाता है। ये हार्मोन हमारे पूरे शरीर का मेटाबॉलिज्म रेगुलेट करता है और होने वाली मां को इस हार्मोन की जरूरत बहुत ज्यादा होती है। ये बहुत जरूरी है कि होने वाली मां के थायराइड लेवल जांचे जाएं। ये सिर्फ फर्स्ट ट्राइमेस्टर में ही नहीं बल्कि प्रेग्नेंसी के अलग-अलग चरणों में भी चेक किया जाता है। ये टेस्ट थायराइड हार्मोन की खून में मौजूदगी को टेस्ट करता है।

क्यों है ये जरूरी- थायराइड हार्मोन के लो लेवल्स फीटल मेटाबॉलिज्म और फीटस के दिमाग के विकास पर असर करता है। इसके बहुत हाई लेवल गर्भपात का खतरा और अन्य जटिलताओं को पैदा कर सकते हैं।

कैसे किया जाता है ये टेस्ट- TSH और फ्री T4 लेवल को जांचने के लिए ब्लड सैम्पल लिया जाता है।
जेस्टेशनल डायबिटीज (GDM) स्क्रीन-

इंसुलिन एक ऐसा हार्मोन है जो हमारे शरीर की ग्लूकोज की जरूरत और उपलब्धता को कंट्रोल करता है। प्रेग्नेंसी एक ऐसी स्टेज है जिसमें ग्लूकोज की जरूरत कई गुना बढ़ जाती है। हमारी भारतीय शाकाहारी डाइट में कई सिंपल कार्बोहाइड्रेट्स होते हैं। महिलाएं जिनके माता-पिता को डायबिटीज हुई है उन्हें प्रेग्नेंसी के दौरान जेस्टेशनल डायबिटीज होने का खतरा हो सकता है।

क्यों जरूरी है ये- शरीर में बढ़े हुए शुगर लेवल अगर लंबे समय तक रहते हैं तो ये अंदरूनी अंगों को खराब कर सकते हैं, खासतौर पर किडनी को और इनका कम उपयोग मां को ब्लड शुगर की कमी महसूस करवा देता है जबकि असल मायने में खून में भरपूर शुगर होती है। इसके कारण ऐसा हो सकता है कि बच्चे को ज्यादा खाना खिला दिया जाए और बच्चा ओवरवेट हो जिससे डिलीवरी के समय अन्य तरह की परेशानियां हो सकती हैं।
ब्लड शुगर लेवल टेस्ट-

पहले एक स्क्रीनिंग टेस्ट होता है जिसमें RBS-रैंडम ब्लड शुगर की जांच ब्लड सैम्पल में की जाती है। ये टेस्ट इसलिए किया जाता है ताकि ब्लड में शुगर की मौजूदगी को पहचाना जा सके। अगर ब्लड में ज्यादा बढ़े हुए शुगर लेवल पाए जाते हैं तो एक ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट किया जाता है। प्रेग्नेंट मां एक शुगर सॉल्यूशन पीती है और अलग-अलग समय पर ब्लड सैम्पल लिया जाता है जो ये बताता है कि शरीर शुगर लोड पर किस तरह से रिएक्ट करेगा।

हालांकि, HbA1c टेस्ट बहुत सटीक है और RBS टेस्ट के साथ ही इसे किया जाता है। ये टेस्ट आमतौर पर 24वें हफ्ते के बाद या प्रेग्नेंसी के दूसरे ट्राइमेस्टर में किया जाता है।
विटामिन-B12 -

विटामिन-B12 दिमाग और न्यूरोलॉजिकल विकास के लिए बहुत जरूरी है। भारतीय (खासतौर पर वेजिटेरियन डाइट) वाले लोगों को विटामिन-B12 की कमी होना आम बात है।

ये जरूरी क्यों है- इसकी किसी भी तरह की कमी बहुत गंभीर समस्याएं पैदा कर सकती है जैसे स्पाइना बिफिडा (Spina bifida) या बच्चे में दिमाग और नर्व्स का खराब विकास।
विटामिन-D -

ये टेस्ट प्रेग्नेंट महिला की बाजू में मौजूद नसों से लिए ब्लड सैम्पल से किया जाता है।

ये क्यों जरूरी है- इसकी किसी भी तरह की कमी कमजोर हड्डियों के विकास और नवजातों में छोटे कद जैसी समस्याओं को जन्म दे सकती है।
इन्फेक्शन स्टेटस को चेक करने के लिए किए जाने वाले टेस्ट्स-

हेपेटाइटिस B एंटीजन टेस्ट- हेपेटाइटिस एक तरह का लिवर इन्फेक्शन है जो संक्रमित मां से फीटस तक पहुंच सकता है। ये विकसित होते बच्चे के लिए बहुत गंभीर जटिलताएं पैदा कर सकता है।

HCV टेस्ट- ये टेस्ट हेपेटाइटिस C इन्फेक्शन की जानकारी के लिए किया जाता है। हेपेटाइटिस C मां से फीटस तक पहुंच सकता है और नवजात में बहुत गंभीर बीमारियां पैदा कर सकता है।

रूबेला इन्फेक्शन (जर्मन मीजल्स)- इस टेस्ट में मां के खून में मौजूद किसी भी तरह की एंटीबॉडी का टेस्ट किया जाता है। ये प्रेग्नेंसी के पहले कुछ महीनों में होता है और इसमें ऐसी स्थितियों का पता लगाया जाता है कि कहीं बच्चे में गंभीर विकास से जुड़ी समस्याएं जैसे मेंटल रिटार्डेशन, आंखों और कानों का खराब काम आदि तो नहीं है। अगर ये अभी नहीं है तो क्या कभी भविष्य में ऐसा इन्फेक्शन हो सकता है।

HTV इन्फेक्शन- AIDS हमारे लिए कोई नई टर्म नहीं है और ये एक ऐसा गंभीर संक्रमण है जिसकी जांच बहुत ही अच्छे से की जानी चाहिए। होने वाली मां की ठीक से जांच बहुत जरूरी है और HIV इन्फेक्शन शरीर के इम्यून सिस्टम पर असर डालता है और मां से बच्चे को पास होने का खतरा बहुत ज्यादा होता है।

VDRL टेस्ट/ सेक्शुअली ट्रांसमिटेड डिजीज टेस्ट- वेनेरियल डिजीज रिसर्च लेबोरेटरी टेस्ट इसलिए किया जाता है ताकि सिफलिस इन्फेक्शन की जांच की जा सके। ये एक तरह का बैक्टीरियल इन्फेक्शन होता है जिससे कई तरह के कॉम्प्लिकेशन प्रेग्नेंसी के दौरान हो सकते हैं और ये मां से बच्चे तक भी पहुंच सकता है।

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wordpress 3 years ago 5 Answer
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